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Thursday, 30 August 2012

परिषदीय विद्यालयों के कोर्स में अब पर्यावरण और स्वास्थ्य शिक्षा भी

UPTET / टीईटी / TET

परिषदीय विद्यालयों के कोर्स में अब पर्यावरण और स्वास्थ्य शिक्षा भी



Story Update : Thursday, August 30, 2012     1:08 AM
0 एनसीईआरटी की पहल पर राज्य शिक्षा संस्थान को सौंपी गई पाठ्यक्रम विकास की जिम्मेदारी
0 यूनीसेफ की टीम ने संस्थान के विशेषज्ञों के साथ बैठक में कोर्स में शामिल बिंदुओं पर चर्चा की
इलाहाबाद। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों को अगले शैक्षिक सत्र से जल संरक्षण और शुद्ध पेयजल की जानकारी के साथ स्वास्थ्य शिक्षा की जानकारी के साथ साफ-सफाई से अवगत कराया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से एनसीईआरटी की सिफारिश के आधार पर अगले शैक्षिक सत्र से इस पाठ्यक्रम के आधार पर पढ़ाई शुरू करने को कहा गया है। पाठ्यक्रम के विकास की जिम्मेदारी राज्य शिक्षा संस्थान को सौंपी गई है।
राज्य शिक्षा संस्थान की प्राचार्या डॉ. सुत्ता सिंह ने बताया कि पाठ्यक्रम का विकास संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से किया जा रहा है। अब तक तैयार पाठ्यक्रम और उसमें शािमल बिंदुओं की समीक्षा के लिए मंगलवार को यूनीसेफ की एक टीम राज्य शिक्षा संस्थान पहुंची। इस टीम की ओर से पाठ्यक्रम के विकास पर चर्चा की गई।
प्राचार्या डॉ. सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था प्राथमिक विद्यालय में पहली कक्षा से आठवीं तक के छात्रों को स्वास्थ्य शिक्षा के अंतर्गत खाने से पहले छात्रों को हाथ धोने तक की जानकारी दी जाएगी। छात्रों को मिड-डे मील से पहले किस प्रकार से हाथ धोया जाए, खाने के बाद बचे खाद्य पदार्थ के निस्तारण आदि की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि छात्रों को खुले में शौच के खतरे से अवगत कराने के साथ इससे रोका भी जाएगा।
टीम से बातचीत के दौरान डॉ. सुत्ता सिंह ने कहा कि छात्रों के कोर्स में जल संरक्षण को भी शामिल किया जाएगा। छात्रों को चित्रों आदि के माध्यम से पानी के बचाव के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही दूषित पेयजल से होने वाली बीमारियों की जानकारी केबाद शुद्ध पेयजल की महत्ता के बारे में बताया जाएगा। कोर्स में पर्यावरण के संरक्षण को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नए सत्र में भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी की किताबों में छात्रों के उपयोग के कोर्स को शामिल करके जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि छात्रों को कोई नई पुस्तक लागू नहीं की जाएगी। 

Source- Amar Ujala
30-8-2012

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