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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शिक्षक भर्ती की तैयारी शुरू ***चुनावी गणित में भावी शिक्षकों पर भी डोरे *** :----

Friday, 9 March 2012

मानकों की अनदेखी का लगाया आरोप

इलाहाबाद : इलाहाबाद विवि में इन दिनों शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन पत्र भरे जा रहे हैं। कतिपय शिक्षकों का मानना है कि शिक्षक भर्ती के लिए किए गए विज्ञापन में विवि प्रशासन ने इच्छानुसार ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था कर विवि अनुदान आयोग के स्ट्रिक्ट इंप्लीमेंटेशन आफ रिजर्वेशन पॉलिसी गाइडलाइन 2006 का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
शिक्षक भर्ती में विभिन्न संकायों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ओबीसी के आरक्षण की व्यवस्था है लेकिन प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है। कुछ जगहों पर इसका कारण एकल पद बताया गया है। अधिकांश शिक्षकों का कहना है कि अगर विवि को यूनिट माना गया है तो फिर ऐसा करना मुश्किल नहीं है। विज्ञान संकाय की बात करें तो यहां असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर ओबीसी आरक्षण है पर प्रोफेसर के पद पर नहीं है। यूजीसी की गाइड लाइन में स्पष्ट है कि सभी पदों, चाहे उन्हें जिस किसी नाम से जाना जाता हो, आरक्षण के संबंध में स्पष्ट घोषणा की जाएगी। विवि के कई शिक्षक कहते हैं कि अगर विवि एकल सीट होने की आड़ लेना भी चाहे तो कम से कम इसे रोस्टर की घोषणा करनी चाहिए। हालांकि इन लोगों का मानना है कि जब आप विवि को यूनिट मानते हैं तो एकल पदों वाली स्थिति सामान्यत: पैदा नहीं होती। इस संबंध में विवि के पीआरओ प्रो. पीके साहू आरोप को नकारते हैं कि विभाग और संकाय के संबंध में आप बात नहीं कर सकते हैं। विवि को यूनिट माना गया है और जो भी व्यवस्था है वह यूजीसी प्रावधानों के अनुरूप है।

डेट आफ एजिजिबिलिटी बनेगी कइयों के गले की फांस

इलाहाबाद : विवि में शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसको लेकर लगभग दो दर्जन शिक्षकों में एक अलग किस्म की घबड़ाहट पैदा हो गई। दरअसल इन शिक्षकों की डेज आफ एलिजिबिलिटी तय न होने से यह शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर नहीं बन पाए हैं। ऐसे में कई विभागों में ऐसा भी हो सकता है कि उनसे कम सेवा किए हुए लोग एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर काबिज हो जाएंगे।
मालूम हो कि विवि के करीब दो दर्जन शिक्षक अभी भी ग्रेड तीन पर हैं। दरअसल ग्रेड तीन पर तीन साल बिताने के बाद अपने आप यह शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर बन जाते हैं। ऐसे मे तीन साल से दो गुना समय इसी ग्रेड पर इन शिक्षकों को इसलिए बिताना पड़ा क्योंकि यह मामला अभी हल नहीं हो सका है। कुछ शिक्षक इस पर न्यायालय की शरण भी ले चुके हैं। ऐसे में अगर इन शिक्षकों के विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्तियां होती हैं तो तकनीकी तौर यह शिक्षक ज्यादा अवधि तक स्थायी शिक्षक के तौर पर सेवा करने के बावजूद नवनियुक्त एसोसिएट प्रोफेसर से नीचे हो जाएंगे। पीड़ित तो यह शिक्षक पहले से थे क्योंकि इन्हें तगड़ा आर्थिक नुकसान कई सालों से उठाना पड़ रहा है लेकिन असली पीड़ा तो होगी जब स्थाई तौर पर इनसे कम अवधि तक पढ़ा चुके शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर बनकर इन्हीं के विभागों में तैनात होंगे।

Wednesday, 7 March 2012

कई और परीक्षाओं में भी लगा है गड़बड़ी का आरोप

लखनऊ (एसएनबी)। बेसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कीपरीक्षा के घोटाले के अलावा परिवार कल्याण व स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा आयोजित प्रयोगशाला सहायक, स्टाफ नसरे व लैब व एक्सरे टेक्नीशियन की परीक्षा भी विवादों में रही है। इन परीक्षाओं में ज्यादातर में घोटाले का आरोप लगा है पर अभ्यर्थियों के हंगामे को दबा दिया गया। प्रयोगशाला सहायक के प्रशिक्षण की परीक्षा दो हजार नौ में आयोजित की गयी थी। इसमें मनमाने तरीके से भर्ती करने का आरोप लगाया गया था। कई माह तक विवादों में रहने के बाद परीक्षा परिणाम निकालने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण तो दिला दिया गया। इसके अलावा 2010 में हुई स्टाफ नसरे के चयन में भी धांधली का आरोप लगा था। इसके लिए भीअभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य महानिदेशालय पर हंगामा मचाया था ,पर बाद में पारदर्शिता का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों को शांत करा दिया गया था। इसमें सबसे अधिक बवाल तो एक्सरे व लैब टेक्नीशियन की परीक्षा में इंटव्यू के लिए अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी का आरोप लगाया था। अभ्यर्थियों का कहना था कि महानिदेशालय में इंटरब्यू के लिए अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से बुलाया जा रहा है। अभ्यर्थियों का आरोप था कि चुनाव आचार संिहता लगने के बाद भी इंटरब्यू किये गये। इसका जब अभ्यर्थियों ने विरोध किया तो साक्षात्कार रोक दिया गया।

Source-Rashtriya Sahara
 

टीईटी मामले में आरोप पत्र दाखिल

कानपुर : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के घपले में माध्यमिक शिक्षा परिषद के पूर्व निदेशक समेत 12 आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने रमाबाईनगरकी विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मंगलवार को सभी की पेशी होगी। टीईटी पास कराने के एवज में अभ्यर्थियों से ली घूस के मामले में अकबरपुर सीओ सुभाषचंद्र शाक्य ने माध्यमिक शिक्षापरिषद के पूर्व निदेशक संजय मोहन समेत 12 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश अली जामिन की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मामले में आरोप पत्र पर बहस के बाद अदालत ने संजय मोहन पर धोखाधड़ी, षड्यंत्र व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत संज्ञान लिया है।

Source- Jagran
6-3-2012

Tuesday, 6 March 2012

प्रमुख वन संरक्षक पद पर नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग सख्त

प्रमुख वन संरक्षक पद पर नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग सख्त

-बिना मंजूरी कनिष्ठ अधिकारी को पद सौंपने पर वन विभाग से जवाब तलब
लखनऊ, जागरण ब्यूरो : प्रदेश में आचार संहिता के लागू रहते चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना प्रमुख वन संरक्षक पद पर कनिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति का मामला वन विभाग के लिए मुसीबत बन गया है। इस आशय की शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने शासन से जवाब तलब किया है।
वन विभाग में प्रमुख वन संरक्षक स्तर के दो आला अधिकारी हाल ही में रिटायर हुए हैं। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) के पद से बीके पटनायक विगत 31 जनवरी और प्रमुख वन संरक्षक के पद से डीएनएस सुमन 29 फरवरी को सेवानिवृत्त हुए। इन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति से प्रमुख वन संरक्षक के दोनों पदों पर होने वाली रिक्तियों को भरने के मद्देनजर शासन ने विगत 25 जनवरी को विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक करायी थी। डीपीसी में अपर प्रमुख वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) मोहम्मद अहसन और अपर प्रमुख वन संरक्षक (परियोजना) जेएस अस्थाना को प्रमुख वन संरक्षक स्तर पर प्रोन्नत कर तदनुसार स्केल देने का फैसला किया गया। मो.अहसन भारतीय वन सेवा के 1978 बैच के अधिकारी हैं। जेएस अस्थाना 1979 बैच के हैं। 31 जनवरी को बीके पटनायक के रिटायर होने पर मो.अहसन को प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया। वहीं 29 फरवरी को डीएनएस सुमन के रिटायर होने पर जेएस अस्थाना को प्रमुख वन संरक्षक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई। प्रमुख वन संरक्षक पद पर अस्थाना की स्थायी नियुक्ति के लिए पत्रावली मुख्यमंत्री को संदर्भित कर दी गई है। प्रमुख वन संरक्षक का पद विभागाध्यक्ष का पद हैं लेकिन वरिष्ठ अधिकारी के होते हुए इस पद पर कनिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई। वह भी चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना। इस बात की चुनाव आयोग से शिकायत की गई। शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने प्रमुख सचिव वन से जवाब तलब किया है।
Source- Jagran

30 की जगह 60 अभ्यर्थी हो गए क्वालीफाई

इलाहाबाद : कर्मचारी चयन आयोग द्वारा भारतीय खाद्य निगम में असिस्टेंट ग्रेड-2 व हिंदी टाइपिस्ट के पदों पर ली गई भर्ती परीक्षा में गलती से 30 की जगह 60 अभ्यर्थी सफल हो गए। यह गड़बड़ी दो अभ्यर्थियों द्वारा एक ही अनुक्रमांक भरे जाने के कारण हुई। फिलहाल आयोग की वेबसाइट पर ऐसे अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक व नाम अपलोड कर दिए गए हैं। आयोग ने इन 60 अभ्यर्थियों के प्रथम पेपर के अंक एसएससी.एनआइसी.इन पर प्रदर्शित कर दिए हैं। आयोग ने ऐसे 11 अन्य अभ्यर्थियों के नाम भी प्रदर्शित किए हैं, जिन्होंने कट ऑफ मा‌र्क्स से अधिक अंक हासिल किए हैं, पर असिस्टेंट ग्रेड-2 का आप्शन नहीं भरा है। क्षेत्रीय कार्यालयों ने जो डाटा आयोग मुख्यालय को उपलब्ध कराया है उसके मुताबिक ऐसे अभ्यर्थियों का नाम भी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया है। ये अभ्यर्थी यदि असिस्टेंट ग्रेड-2 का आप्शन भरा है और इसका प्रमाण उनके पास मौजूद हो तो आयोग ऐसे अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम घोषित कर देगा। आयोग सभी 11 अभ्यर्थियों से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों से संपर्क करने को कहा है।

Source- Jagran
 6-3-2012

बीएड फार्म के लिए मारामारी

आजमगढ़: प्रधान डाकघर से वितरित किये जा रहे बीएड फार्म के लिए सोमवार को जमकर धक्का-मुक्की हुई। इसका मूल कारण बना लिफाफा। लिफाफे पर एससी लिखा था लेकिन उसमें ओबीसी का फार्म था। अब इसे डाककर्मियों की लापरवाही या अभ्यर्थियों का दुर्भाग्य। फार्म के लिए सुबह से ही अभ्यर्थी लाइन लगाकर काउंटर खुलने का इंतजार करते रहे। कार्यालय समय पर जब कांउटर खुला तो फार्म का वितरण इस तरह से हुआ। इसको लेकर अभ्यर्थियों ने डाकघर कर्मियों को जमकर खरीखोटी सुनाई। मामला गंभीर देख डाक प्रशासन ने इसकी सूचना नगर कोतवाली पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह अभ्यर्थियों को समझाबुझाकर शांत कराया। इसके बाद ही माहौल सामान्य हुआ। चर्चा रही यदि इसी तरह लापरवाही होती रही तो एक न एक दिन यह बड़े बवाल का कारण बन सकती है। इस पर डाक प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
Source-Jagran

बेसिक हेल्थ वर्कर परीक्षा में भी हुई धांधली

लखनऊ, 5 मार्च (जाब्यू) : बेसिक हेल्थ वर्कर परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में शासन ने मंगलवार को परिवार कल्याण विभाग की अपर निदेशक डॉ.उषा नारायण, संयुक्त निदेशक डॉ.राजेंद्र प्रसाद, डॉ. राजीव बंसवाल और डॉ.पंकज सक्सेना को निलंबित किया है। प्रमुख सचिव संजय अग्रवाल ने बताया कि बेसिक हेल्थ वर्कर परीक्षा में अनियमितताओं की पुष्टि के बाद कार्रवाई की गई। इसके अलावा सेवानिवृत्त महानिदेशक सीबी प्रसाद कोचार्जशीट जारी की गई है। आडिट जांच के अलावा निदेशक हिमांशु कुमार के नेतृत्व में बनी कमेटी ने भी परीक्षा में धांधली के आरोप सही साबित हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ सेवाएं दुरुस्त करने को बेसिक हेल्थ वर्कर नियुक्ति करने की योजना के तहत 12 जून 2010 को करीब चार लाख महिला व नौ लाख से अधिक पुरुष अभ्यर्थियों ने परीक्षा हिस्सा लिया था, जिसका परिणाम एक माह बाद जुलाई 2010 में घोषित होना था, लेकिन नतीजे जारीहोने से पहले ही हंगामा शुरू हुआ। तत्कालीन डीजी रामजी लाल ने जांच को समिति गठित की। गडबड़ी की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने पर नवंबर 2011 में परीक्षा निरस्त कर दी गई।

Source- Jagran
6-3-2012

Monday, 5 March 2012

अब पीजीटी रिजल्ट में भी अनियमितता

इलाहाबाद। टीजीटी चयन परिणाम में गड़बड़ियों का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड पर एक और नतीजे में अनियमितता बरतने का आरोप लगा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन बोर्ड ने पीजीटी परिणाम में भी कई ऐसे प्रतिभागियों को सफल घोषित कर दिया है जो लिखित परीक्षा में असफल थे। दावा है कि गड़बड़ी पकड़े जाने के भय से बोर्ड ने संशोधन के नाम पर कुछ विवादित नाम तो हटा दिए लेकिन परिणाम में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां हैं, जिन्हें ठीक नहीं किया गया।
टीजीटी नतीजों में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद हुई जांच में पीजीटी के परिणाम में भी कुछ ऐसे नाम सामने आए जो लिखित परीक्षा में सफल नहीं थे। अभ्यर्थियों का दावा है कि हिन्दी, संस्कृत, इतिहास, समाजशास्त्र, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, वाणिज्य, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, नागरिक शास्त्र, कृषि, शिक्षाशास्त्र के परिणाम की पूरी तरह से स्कैनिंग की तो इसमें बोर्ड के पदाधिकारियों, सदस्यों और कुछ पुराने सदस्यों के आश्रितों और रिश्तेदारों केनाम सामने आए।
परीक्षा में शामिल संजय पांडेय, रामानुज, ओमप्रकाश मिश्र, आशुतोष, चंद्रशेखर आदि का दावा है कि टीजीटी में गड़बड़ी का खुलासा होते ही चयन बोर्ड अधिकारियों ने पीजीटी परिणाम में चुपचाप संशोधन किया और एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी के दो सगे रिश्तेदारों का नाम अंतिम चयन सूची से बाहर कर दिया लेकिन लगभग 20 और रोलनंबर्स को लेकर गड़बड़ियों के आरोप है, जिनके बारे में चयन बोर्ड ने कोई फैसला नहीं किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरा परिणाम संशोधित न किया गया तो मामला शासन तक ले जाएंगे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।

Source- Amar Ujala
5-3-2012

उस्ताद निकला चयन बोर्ड का कंप्यूटर

इलाहाबाद, 4 मार्च (जाका): आइटी विशेषज्ञों को उप्रमाध्यमिक शिक्षा सेवा चयनबोर्ड के उस कंप्यूटर के बारे में शोध करना चाहिए, जिसने गलती से टीजीटी-पीजीटी नियुक्ति के लिए बोर्ड पदाधिकारियों के ऐसे रिश्तेदार चुन लिए, जोलिखित परीक्षा में बैठे ही नहीं थे। भुक्तभोगी अभ्यर्थियों द्वारा कंप्यूटर की इस गलती का भंडाफोड़ कर दिए जाने के बाद हालांकि, ऐसे पांच अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर कर दिए गए हैं, पर आशंका है कि बोर्ड का कंप्यूटर ऐसी और न जाने कितनी गलतियां कर चुका होगा। मौजूदा प्रकरण उच्चन्यायालय में विचाराधीन है। कंप्यूटर की गलती से जो पांच अभ्यर्थी सीधे चुन लिए गए थे, उनमें से एक बोर्ड के सदस्य का बेटाहै, जबकि एक अन्य महिला अभ्यर्थी बोर्ड के एक अन्य उच्चाधिकारी की करीबी रिश्तेदार। बाकी तीन अभ्यर्थी भी बोर्ड के असरदार पदाधिकारियों के करीबी नाते-रिश्तेदार हैं। आश्चर्य की बात यह हैकि इतने गंभीर रहस्योद्घाटन के बावजूद बोर्ड प्रशासन ने अब तक कंप्यूटर के अलावा किसी अन्य की जिम्मेदारी निर्धारित नहीं की है, कार्रवाई तो दूर की बात है। बहरहाल, अनुचित ढंग सेचयनित पांच अभ्यर्थियों को बाहर करवाने में सफल होचुके अन्य अभ्यर्थियों काकहना है कि वे उच्च न्यायालय से याचना करेंगेकि इस नियुक्ति घोटाले की जांच किसी भरोसेमंद एजेंसी से कराने का आदेश दे ताकि इससे पहले की तमामनियुक्तियों में हुई धांधली का भी भंडाफोड़ हो सके। दरअसल, कई अभ्यर्थियों के लिखित परीक्षा में सफल हुए बिना चयन हो जाने पर प्रतियोगी छात्रों ने ही आपत्ति उठाई थी। शुरू में बोर्ड प्रशासन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से साफ इन्कार करता रहा, पर प्रकरण उच्च न्यायालय पहुंचने पर कंप्यूटर की गलती पकड़ में आ गई और पांच अभ्यर्थीचयन सूची से बाहर कर दिए गए। बोर्ड के ही सूत्रों का कहना है कि जब तक अंक नहीं बढ़ाए जाएं, अभ्यर्थी मेरिट में नहीं आ सकता। जब तक मेरिट में नहीं आएगा, तब तक केजिंग नहीं होगी। सवाल उठता है कि जिस अभ्यर्थी का नाम मेरिट लिस्ट में नहीं था, वह सामाजिक विज्ञान की केजिंग लिस्ट में कैसे आ गया? सवाल यह भी उठ रहा हैकि क्या इसकी जानकारी अध्यक्ष व संबंधित सदस्य को नहीं थी? अभ्यर्थियों का कहना है कि अपने मकसद में कामयाब होने के बाद ओएमआर शीट बदलने की योजना थी, जो फलीभूत नहीं हो सकी। पैनल की जांच में चारऔर पकड़े गए : प्रशासनिक अधिकारियों ने जब फाइनल पैनल की परीक्षा परिणाम से जांच कराई तो उसमें प्रवक्ता के चार ऐसे अभ्यर्थी मिले, जो लिखित परीक्षा में फेल थे। बाद में जांच समिति की आपत्ति के बाद इन चारों को भी बाहर कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक ये चार अभ्यर्थी भी जिम्मेदार लोगों के ही खास थे।

Source- jagran
5-3-2012

Saturday, 3 March 2012

टीईटी घोटाला: कंप्यूटर कंपनी को ठेका मामले में प्रभा त्रिपाठी से पुलिस ने की दो घंटे पूछताछ

रमाबाई नगर की पुलिस बुधवार को यहां पार्क रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा परिषद निदेशक के शिविर दफ्तर पहुंची। प्रभा ने गिरफ्तारी से बचने को हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे ले रखा है। पुलिस ने यहां प्रभा त्रिपाठी के बारे में पूछा। वह मौजूद नहीं थीं। करीब एक घंटे बाद प्रभा त्रिपाठी शिविर कार्यालय पहुंची। बताया जाता है कि रमाबाई नगर की पुलिस करीब पांच बजे शिविर कार्यालय पहुंची जहां बंद कमरे में उनसे पूछताछ शुरू हुई। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने प्रभा त्रिपाठी से पूछा कि फार्म की बिक्री से आए 62 करोड़ रुपये कहां गए, खाता लखनऊ में किसके कहने पर खोला गया, टीईटी रिजल्ट कराने के लिए कंप्यूटर कंपनी को ठेका किसके कहने पर दिया गया, ठेके के लिए टेंडर कब निकाला गया, कितने छात्र-छात्रों के रिजल्ट संशोधित किए गए, रिजल्ट संशोधन के नाम पर कितने लोगों से वसूली की गई। सूत्रों का कहना है कि प्रभा त्रिपाठी ने पुलिस को कुछ खास जानकारी नहीं दी है। उन्होंने अधिकतर सवालों का जवाब संजय मोहन के पास होने की जानकारी देकर टाल दी है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की पूर्व सचिव प्रभा त्रिपाठी से रमाबाई नगर की पुलिस ने लगभग दो घंटे तक पूछताछ की। उन्होंने पुलिस को बताया कि टीईटी फार्म का खाता पंजाब नेशनल बैंक में माध्यमिक शिक्षा निदेशक और सचिव के संयुक्त नाम से खोला गया था। इससे कितनी धनराशि कब निकाली गई, इसकी पूरी जानकारी उन्हें भी नहीं है। उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की धांधली के बारे में भी पुलिस को खास जानकारी नहीं दी है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि टीईटी धांधली की जांच कर रही रमाबाई नगर पुलिस के दो अधिकारियों को शासन में बुलाया गया था। इनसे पूछा गया कि टीईटी में कितनी धांधली हुई है? क्या परीक्षा रद की जा सकती है?

विदित है कि टीईटी में एक निजी कंपनी को नियम विरुद्ध ढंग से ठेकार दिये जाने व इस कंपनी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर सरकारी रिकार्ड को अपने डाटाबेस में स्टोर कर अनैतिक लाभ लिये जाने का खुलास सबसे पहले JNI ने ही

Source- blog visiter

UPTET STAY TILL 16-3-2012


Friday, 2 March 2012

आरओ-एआरओ के 254 पदों पर भर्ती शीघ्र

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग जल्द ही सचिवालय संवर्ग और लोक सेवा आयोग संवर्ग के लिए समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) के 254 पदों की घोषणा करेगा। उम्मीद है इन पदों की घोषणा माह के आखिरी तक कर दी जाएगी। खाली पदों की सूचना शासन ने आयोग को पिछले महीने ही भेज दी थी। इस दौरान पीसीएस-पीसीएस जे समेत कई पदों के विज्ञापन जारी होने से आरओ और एआरओ के पदों की घोषणा टाल दी थी। इधर, सूत्रों का कहना है कि शासन द्वारा और पदों की संख्या बढ़ाए जाने की उम्मीद है इसलिए घोषणा नहीं की जा रही है। शासन की ओर से सहायक समीक्षा अधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए अब निर्धारित शैक्षिक अर्हता के साथ कम्प्यूटर में ‘ओ लेवल’ अनिवार्य कर दिया गया है। बदले पैटर्न पर आयोग की ओर से पहली बार इस परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। ‘ओ लेवल’ शैक्षिक अर्हता अनिवार्य कर दिए जाने के बाद अब इन पदों के लिए एसएससी, बैंकिंग, रेलवे परीक्षा की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों का दबाव बढ़ेगा।
Source- Jagran
3-2-2012

डिग्री प्रवक्ताओं के चयन की होगी जांच

इलाहाबाद। उच्चतर शिक्षा आयोग से मई 2007 के बाद डिग्री कालेजों में प्रवक्ता पद पर हुई नियुक्तियों की जांच होगी। शासन ने मंडलायुक्त को पूरे मामले की जांच का निर्देश दिया है। प्रदेश के अशासकीय डिग्री कॉलेजों में प्रवक्ता और प्राचार्य के पदों पर चयन के लिए गठित उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की कार्यशैली को लेकर शुरू से ही आपत्ति उठती रही है। आयोग ने 2007-08 में विज्ञापन संख्या 41 के तहत प्रवक्ता के लिए विज्ञापित कुल 552 के लिए साक्षात्कार शुरू किया था। इस दौरान तमाम बाधाओं के बाद आयोग ने 486 पदों के लिए साक्षात्कार पूरा करके इसकी सूची नियुक्ति के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय को भेज दी। इसमें से अधिकांश चयनित प्रवक्ताओं को नियुक्ति भी मिल गई है। इसके बाद बचे हुए पदों का साक्षात्कार साल भर बाद हो सका। डिग्री प्रवक्ता के 486 पदों पर चयन को लेकर आयोग सदस्यों के आरोप लगाने पर शासन ने मामले की प्रारंभिक जांच मंडलायुक्त से करवाई थी। इसमें कुछ ऐसे लोगों का भी चयन कर लिया गया था जो निर्धारित अर्हता भी पूरी नहीं करते थे। प्रारंभिक जांच में आरोप की पुष्टि होने पर आयोग से सभी नियुक्तियों की जांच कराने का फैसला शासन ने लिया है। सूत्रों का कहना है कि अब प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से हुए सभी चयन की जांच शुरू की गई है। शासन के फैसले से आयोग में हड़कंप मचा हुआ है।
Source- Amar  Ujala
2-3-2012

टीजीटी मामले में जवाब तलब

इलाहाबाद (एसएनबी)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीजीटी-2010 में सोशल साइन्स विषय के घोषित परिणाम को रद करने की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने रवि भूषण सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका पर 14 मार्च को सुनवाई होगी। टीजीटी सोशल साइन्स का परिणाम 17 फरवरी 2012 को घोषित किया गया था। न्यायालय में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिवक्ता ने आस्त किया कि आयोग इस बीच नियुक्ति सम्बंधी कोई पत्र जारी नहीं करेगा।

Source- R.Sahara
 

Thursday, 1 March 2012

(टीईटी) माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की पूर्व सचिव पर कसा शिकंजा

रमाबाई नगर, हमारे प्रतिनिधि : टीईटी में चयन के नाम पर अभ्यर्थियों से वसूली के मामले में अब पुलिस ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की पूर्व सचिव प्रभा त्रिपाठी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। तलाश में घूम रही पुलिस टीम ने लखनऊ में उनसे पूछताछ की। साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में मेरठ व आगरा भी पुलिस टीम गयी है।
बताते चलें कि 31 दिसंबर को पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर 86 लाख 73हजार रुपये बरामद कर टीईटी चयन के नाम पर अभ्यर्थियों से वूसली का पर्दाफाश किया था। इसके बाद पुलिस ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन व साक्षरता के प्रोग्राम कोआर्डीनेटर नरेंद्र प्रताप सिंह को भी गिरफ्तार कर चयन संबधी अभ्यर्थियों के प्रपत्र व भारी मात्रा में धनराशि बरामद की थी। 17 फरवरी को कोर्ट के आदेश पर रिमांड पर लाकर पुलिस ने पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक से पूछतांछ की थी और गिरोह में अन्य सदस्यों के बाबत जानकारी जुटायी थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में अबतक गिरफ्तार हुए पूर्व निदेशक माध्यमिक शिक्षा संजय मोहन, नरेंद्र प्रताप सिंह, रमा शंकर मिश्रा, विनय सिंह, रतन कुमार, अमरेंद्र कुमार, मनीष चतुर्वेदी, माधव सिंह, हेमंत कुमार व योगेश कुमार के खिलाफ 25 फरवरी को गैंगस्टर के तहत मुकदमा दर्ज किया था। छानबीन में जुटे अकबरपुर सीओ सुभाष शाक्य के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बुधवार को लखनऊ जाकर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की पूर्व सचिव प्रभा त्रिपाठी से पूछतांछ की। इस बाबत पूछने पर सीओ ने पूर्व सचिव से पूछतांछ में मिले तथ्यों के बाबत जानकारी देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अबतक की पड़ताल में सामने आये गिरोह के सदस्यों की तलाश में मेरठ व आगरा पुलिस टीम गयी है।
Source- Jagran

चयन बोर्ड ने सुधारी गलती, परिणाम संशोधित

इलाहाबाद। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने टीजीटी सामाजिक विज्ञान परिणाम में हुई गड़बड़ी सुधार ली है। बोर्ड सदस्यों के साथ बुधवार को बैठक के बाद अध्यक्ष ने संशोधित परिणाम जारी कर दिया। उन्होंने माना कि परिणाम में कुछ त्रुटियां थीं। ‘अमर उजाला’ की तरफ से खामियों के बारे में इंगित किए जाने पर जांच कमेटी बनाई गई। कमेटी के साथ बैठ उन्होंने खुद हर रोलनंबर की जांच की। कुछ रोलनंबर के साथ गलतियां हो गईं थीं जिसे संशोधित कर दिया गया।
चयन बोर्ड की ओर से 17 फरवरी को सामाजिक विज्ञान का परिणाम घोषित किया गया था। परिणाम में कुछ ऐसे लोगों को सफल घोषित कर दिया था जो लिखित परीक्षा में सफल नहीं थे। ‘अमर उजाला’ ने 22 फरवरी के अंक में इस गड़बड़ी को उजागर किया। फौरी तौर पर अध्यक्ष ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार कर दिया था लेकिन जांच के लिए कमेटी बना दी थी। कमेटी की संस्तुति पर गलतियां ठीक की गईं। अध्यक्ष डॉ.वर्मा ने सदस्यों से कहा कि किसी भी परिणाम में कोई खामी दिखे, तत्काल उसके बारे में इंगित करें। बैठक में अंग्रेजी प्रवक्ता परिणाम पर भी चर्चा हुई। सदस्यों के साथ समीक्षा के बाद 101 सफल अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक जारी कर दिए गए।
Source- Amar Ujala

तो शिक्षक बनने से वंचित रह जाएंगे कई शोधार्थी

इलाहाबाद : विश्वविद्यालय में ऐसे शिक्षकों की एक परंपरा रही है जिन्होंने यहीं से शिक्षा प्राप्त करने के बाद यहीं पर पढ़ाना शुरू कर दिया। विश्वविद्यालय में इस बार लगभग चार सौ पदों के लिए जो प्रक्रिया शुरू हुई है, वह कई शोधार्थी छात्रों के लिए कष्टप्रद साबित होगी। उनका विवि शिक्षक बनने का सपना पूरा होता नहीं दिखाई देता।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वर्ष 2009 से प्रीडीफिल कोर्स करना आवश्यक बना दिया था। इलाहाबाद विवि के विज्ञान और वाणिज्य संकाय में ऐसे कोर्स चले ही नहीं। कला संकाय में भूगोल, उर्दू, इतिहास, अर्थशास्त्र आदि में ऐसे कोर्स चले जरूर लेकिन बताया जाता है कि वह यूजीसी के मानकों के अनुरूप नहीं थे। जिसकी वजह से कई छात्रों को प्रमाणपत्र नहीं मिल पाए हैं। यूजीसी ने कहा था कि प्री डीफिल में साहित्य सर्वेक्षण और तकनीकी के पेपर होंगे जिसमें प्रेजेंटेशन ही आधार होगा। एक पेपर वैकल्पिक होगा जिसकी परीक्षा देनी होगी। ज्यादातर विभागों ने यूजीसी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जिसकी वजह से कई जगहों पर प्रमाणपत्र छात्रों को नहीं मिल पाए हैं। इसका कारण बताया जा रहा है कि चूंकि यह नियमानुसार नहीं थे इसलिए कुलपति ने इन्हें हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। विवि में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए प्रवेश की अंतिम तिथि 12 मार्च है। ऐसे में तमाम छात्र हैं जो पीएचडी में तीन साल से भी ज्यादा समय से इनरोल्ड हैं लेकिन थिसिस नहीं जमा कर सकते क्यों कि प्रीडीफिल प्रमाणपत्र नहीं है। कुछ विभागों ने यूजीसी नियमों के बजाए अपने नियम के आधार पर थीसिस जमा तो करा ली है लेकिन हो सकता है कि उनके शिक्षक भर्ती के लिए फार्म बाद में अस्वीकृत कर दिए जाएं। ऐसी स्थिति में छात्रों का शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह जाएगा। इस संबंध में इंडियन रिसर्च स्कालर एसोसिएशन के प्रमोद पांडेय, उमेश चंद्र, आरिफा, अवधेश, रविशंकर, राजीव, नफीस, शिवेंद्र सिंह और अन्य शोधार्थियों ने मांग की कि जिन विभागों में डीफिल कोर्स चलाया गया है, उनके प्रमाणपत्र वितरित किए जाएं और जहां नहीं चलाया गया है वहां इसे जल्द से शुरू किया जाए।
Source- Jagran

टीजीटी मामले की सुनवाई 14 मार्च को जवाब तलब

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीजीटी 2010 सोशल साइंस विषय का घोषित परिणाम को रद करने की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायालय में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग के अधिवक्ता ने आश्वस्त किया कि आयोग इस बीच नियुक्ति संबंधी कोई पत्र जारी नहीं करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने रवि भूषण सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है। मालूम हो कि 17 फरवरी 2012 को टीजीटी शोसल साइंस विषय का परिणाम घोषित किया गया था। याचिका में उत्तर पुस्तिका की कार्बन प्रति भी जारी करने की मांग की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च 2012 नियम की गई है।
Source- Jagran
 

UPTET STAY TILL 2-3-2012


CUT OFF MARKS FIXED BY KVS IN CTET CATEGORY WISE FOR PRT & TGT SELECTION


LIST OF SELECTED TGT CANDIDATE FOR INTERVIEW in Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS)

KVS में नियुक्तियाँ लिखित परीक्षा +CTET+INTERVIEW  के आधार पर होगी

 

TGT POST Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS)

SUBJECT-   English, Hindi, Social Studies, Science, Sanskrit and Maths

Kendriya Vidyalaya Sangathan will be conducting interviews for the  posts of  Trained Graduate Teachers (English, Hindi, Social Studies, Science, Sanskrit and Maths) for the year 2011-2012.  The interviews for the posts of Trained Graduate Teachers (English, Hindi, Social Studies, Science, Sanskrit and Maths) will be held  from 12th March, 2012 to 16th March, 2012 .  The candidates have been short-listed on the basis of  their performance in the Preliminary written examination held on 12th February, 2011 and Central Teachers Eligibility Test (CTET) held on 26th June, 2011.  The shortlisted candidates are requested to appear for an interview as per the interview schedule.  The venue for the Interviews is “Kendriya Vidyalaya, J.N.U. Campus, Baba Gang Nath Marg, New Delhi-110067”.  The interview letters for the post of Trained Graduate Teachers (English, Hindi, Social Studies, Science, Sanskrit and Maths) have been sent to the shortlisted candidates through Registered post.  If any candidate does not receive the interview letter, he / she may report at the interview venue as per the interview schedule alongwith Educational original testimonials / certificates / Original Marksheet and Certificate of Central Teacher Eligibility Test (CTET) held on 26th June, 2011. The candidature of the candidates appearing for the interview is purely provisional, subject to verification of their eligibility and CTET mark sheet / Certificate at the time of interview. The candidates belonging to OBC category are required to bring latest OBC certificate issued by the compitent authority in the proforma prescribed by Govt. of India.

FOR CANDIDATE DETAILS CLICK TO BELOW LINK



http://kvsangathan.nic.in/EmployementNotice.aspx


LIST OF SELECTED PRT CANDIDATE FOR INTERVIEW in Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS)

KVS में नियुक्तियाँ लिखित परीक्षा +CTET+INTERVIEW  के आधार पर होगी



Kendriya Vidyalaya Sangathan will be conducting interviews for the  posts of  Primary Teachers for the year 2011-2012.  The interviews for the posts of Primary Teachers will be held from 17th March, 2012 to 26th March, 2012 (excluding 18th March & 25th March, 2012 i.e. SUNDAY).  The candidates have been short-listed on the basis of  their performance in the Preliminary written examination held on 12th February, 2011 and Central Teachers Eligibility Test (CTET) held on 26th June, 2011.  The shortlisted candidates are requested to appear for an interview as per the interview schedule.  The venue for the Interviews is “Kendriya Vidyalaya, J.N.U. Campus, Baba Gang Nath Marg, New Delhi-110067”.  The interview letters for the post of Primary Teachers have been sent to the shortlisted candidates through Registered post.  If any candidate does not receive the interview letter, he / she may report at the interview venue as per the interview schedule alongwith Educational original testimonials / certificates / Original Marksheet and Certificate of Central Teacher Eligibility Test (CTET) held on 26th June, 2011. The candidature of the candidates appearing for the interview is purely provisional, subject to verification of their eligibility and CTET mark sheet / Certificate at the time of interview.The candidates belonging to OBC category are required to bring latest OBC certificate issued by the compitent authority in the proforma prescribed by Govt. of India.

List of selected candidate for INTERVIEW Click below link

http://kvsangathan.nic.in/EmployementNotice.aspx

KVS में नियुक्तियाँ लिखित परीक्षा +CTET+INTERVIEW के आधार पर होगी

KVS में नियुक्तियाँ लिखित परीक्षा +CTET+INTERVIEW  के आधार पर होगी