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Saturday, 3 March 2012

टीईटी घोटाला: कंप्यूटर कंपनी को ठेका मामले में प्रभा त्रिपाठी से पुलिस ने की दो घंटे पूछताछ

रमाबाई नगर की पुलिस बुधवार को यहां पार्क रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा परिषद निदेशक के शिविर दफ्तर पहुंची। प्रभा ने गिरफ्तारी से बचने को हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे ले रखा है। पुलिस ने यहां प्रभा त्रिपाठी के बारे में पूछा। वह मौजूद नहीं थीं। करीब एक घंटे बाद प्रभा त्रिपाठी शिविर कार्यालय पहुंची। बताया जाता है कि रमाबाई नगर की पुलिस करीब पांच बजे शिविर कार्यालय पहुंची जहां बंद कमरे में उनसे पूछताछ शुरू हुई। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने प्रभा त्रिपाठी से पूछा कि फार्म की बिक्री से आए 62 करोड़ रुपये कहां गए, खाता लखनऊ में किसके कहने पर खोला गया, टीईटी रिजल्ट कराने के लिए कंप्यूटर कंपनी को ठेका किसके कहने पर दिया गया, ठेके के लिए टेंडर कब निकाला गया, कितने छात्र-छात्रों के रिजल्ट संशोधित किए गए, रिजल्ट संशोधन के नाम पर कितने लोगों से वसूली की गई। सूत्रों का कहना है कि प्रभा त्रिपाठी ने पुलिस को कुछ खास जानकारी नहीं दी है। उन्होंने अधिकतर सवालों का जवाब संजय मोहन के पास होने की जानकारी देकर टाल दी है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की पूर्व सचिव प्रभा त्रिपाठी से रमाबाई नगर की पुलिस ने लगभग दो घंटे तक पूछताछ की। उन्होंने पुलिस को बताया कि टीईटी फार्म का खाता पंजाब नेशनल बैंक में माध्यमिक शिक्षा निदेशक और सचिव के संयुक्त नाम से खोला गया था। इससे कितनी धनराशि कब निकाली गई, इसकी पूरी जानकारी उन्हें भी नहीं है। उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की धांधली के बारे में भी पुलिस को खास जानकारी नहीं दी है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि टीईटी धांधली की जांच कर रही रमाबाई नगर पुलिस के दो अधिकारियों को शासन में बुलाया गया था। इनसे पूछा गया कि टीईटी में कितनी धांधली हुई है? क्या परीक्षा रद की जा सकती है?

विदित है कि टीईटी में एक निजी कंपनी को नियम विरुद्ध ढंग से ठेकार दिये जाने व इस कंपनी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर सरकारी रिकार्ड को अपने डाटाबेस में स्टोर कर अनैतिक लाभ लिये जाने का खुलास सबसे पहले JNI ने ही

Source- blog visiter

6 comments:

shivi said...

ncte ne time badhaya ya nahi

prabhat said...

Shivi ji HRD ne B.Ed walo ko ek mouka de diya h for detail click this link

http://uptetbreakingnews.blogspot.in/2012/02/bed-students-get-one-chance-in-prt-job.html

shivi said...

soory but i can"t understand ki bharti kab tak hone ke chances h is month ya stay hatega ki nai tell me now.

. said...

Sivi ji ,btc 2001 aur btc 2004,ke cases ab bhi court me hai,court me kitna samay lagega koi nahi janta,man lijiye ek stay hat bhi jaye to kya dusra stay lagne me jayada samay lagega,kyoki ab tet dhandali ke pakke saboot upasthit hai,ab court bhi bina janch poori huye bharti ki permission nahi degi.
Behtar ye hota ki tet qualified milkar Ncte par dabav banate ki wo rajya sarkar ko apne deadline ka hawala dekar jald se jald bharti karne ko kahe,sath hi sath court me 'right to education' ka hawala de kar ek PIL dakhil kare jisme kaha jaye ki bharti me der hone ki wajah se primary schools me teachers ki kami se lakho bachcho ka bhavisya kharab ho raha hai,
Ab ye do hi raste hai...sayad isse kuch ho jaye ..aur dharna,ansan,meeting...in sab se kuch nahi hone wala kyoki ab mamla court ka hai..

. said...

उस्ताद निकला चयन बोर्ड का कंप्यूटर
इलाहाबाद, 4 मार्च (जाका): आइटी विशेषज्ञों को उप्रमाध्यमिक शिक्षा सेवा चयनबोर्ड के उस कंप्यूटर के बारे में शोध करना चाहिए, जिसने गलती से टीजीटी-पीजीटी नियुक्ति के लिए बोर्ड पदाधिकारियों के ऐसे रिश्तेदार चुन लिए, जोलिखित परीक्षा में बैठे ही नहीं थे। भुक्तभोगी अभ्यर्थियों द्वारा कंप्यूटर की इस गलती का भंडाफोड़ कर दिए जाने के बाद हालांकि, ऐसे पांच अभ्यर्थी चयन सूची से बाहर कर दिए गए हैं, पर आशंका है कि बोर्ड का कंप्यूटर ऐसी और न जाने कितनी गलतियां कर चुका होगा। मौजूदा प्रकरण उच्चन्यायालय में विचाराधीन है। कंप्यूटर की गलती से जो पांच अभ्यर्थी सीधे चुन लिए गए थे, उनमें से एक बोर्ड के सदस्य का बेटाहै, जबकि एक अन्य महिला अभ्यर्थी बोर्ड के एक अन्य उच्चाधिकारी की करीबी रिश्तेदार। बाकी तीन अभ्यर्थी भी बोर्ड के असरदार पदाधिकारियों के करीबी नाते-रिश्तेदार हैं। आश्चर्य की बात यह हैकि इतने गंभीर रहस्योद्घाटन के बावजूद बोर्ड प्रशासन ने अब तक कंप्यूटर के अलावा किसी अन्य की जिम्मेदारी निर्धारित नहीं की है, कार्रवाई तो दूर की बात है। बहरहाल, अनुचित ढंग सेचयनित पांच अभ्यर्थियों को बाहर करवाने में सफल होचुके अन्य अभ्यर्थियों काकहना है कि वे उच्च न्यायालय से याचना करेंगेकि इस नियुक्ति घोटाले की जांच किसी भरोसेमंद एजेंसी से कराने का आदेश दे ताकि इससे पहले की तमामनियुक्तियों में हुई धांधली का भी भंडाफोड़ हो सके। दरअसल, कई अभ्यर्थियों के लिखित परीक्षा में सफल हुए बिना चयन हो जाने पर प्रतियोगी छात्रों ने ही आपत्ति उठाई थी। शुरू में बोर्ड प्रशासन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से साफ इन्कार करता रहा, पर प्रकरण उच्च न्यायालय पहुंचने पर कंप्यूटर की गलती पकड़ में आ गई और पांच अभ्यर्थीचयन सूची से बाहर कर दिए गए। बोर्ड के ही सूत्रों का कहना है कि जब तक अंक नहीं बढ़ाए जाएं, अभ्यर्थी मेरिट में नहीं आ सकता। जब तक मेरिट में नहीं आएगा, तब तक केजिंग नहीं होगी। सवाल उठता है कि जिस अभ्यर्थी का नाम मेरिट लिस्ट में नहीं था, वह सामाजिक विज्ञान की केजिंग लिस्ट में कैसे आ गया? सवाल यह भी उठ रहा हैकि क्या इसकी जानकारी अध्यक्ष व संबंधित सदस्य को नहीं थी? अभ्यर्थियों का कहना है कि अपने मकसद में कामयाब होने के बाद ओएमआर शीट बदलने की योजना थी, जो फलीभूत नहीं हो सकी। पैनल की जांच में चारऔर पकड़े गए : प्रशासनिक अधिकारियों ने जब फाइनल पैनल की परीक्षा परिणाम से जांच कराई तो उसमें प्रवक्ता के चार ऐसे अभ्यर्थी मिले, जो लिखित परीक्षा में फेल थे। बाद में जांच समिति की आपत्ति के बाद इन चारों को भी बाहर कर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक ये चार अभ्यर्थी भी जिम्मेदार लोगों के ही खास थे।
http://in.jagran.yahoo.com/epaper/article/index.php?choice=show_article&location=37&Ep_relation=13&Ep_edition=2012-03-05&articleid=11173484

pooja said...

agar kal maya ki sarkar aati hai to shayad bharti ke kuch chances h.