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Friday, 24 August 2012

DELHI UNIVERSITY- डीयू में ¨हदी माध्यम के अधिकांश छात्र हो रहे फेल

                                        डीयू में ¨हदी माध्यम के अधिकांश छात्र हो रहे फेल
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी माध्यम के छात्रों का अधिक संख्या में फेल होना इस समय छात्र संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्र संगठनों ने इस संबंध में डीयू प्रशासन को आगाह करते हुए छात्रों के रोष से भी अवगत कराया है। एनएसयूआइ ने तो डीयू प्रशासन को आंकड़ों सहित लिखित शिकायत करते हुए कहा कि एमए राजनीति विज्ञान में 50 फीसद से अधिक छात्र फेल हो गए हैं, वहीं एबीवीपी ने इसके लिए हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए पुस्तकों की उपलब्धता में कमी बताई है। फेल होने पर गुस्साए छात्रों का कहना है कि प्राध्यापकों से कुछ पूछने जाओ तो कहते हैं कि इट्स योर प्रॉब्लम, आई कांट हेल्प यू डियर। ऐसे प्राध्यापकों को बदला जाए। एनएसयूआइ प्रवक्ता अमरीश रंजन पांडेय ने कहा कि हिंदी माध्यम के छात्रों के साथ ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। केवल एमए राजनीति विज्ञान ही नहीं दर्शनशास्त्र, इतिहास जैसे विषयों का भी यही हाल है। छात्र कहते हैं कि कुलपति प्रो. दिनेश सिंह ने जनवरी 2011 में छात्रों से सीधे संवाद कर बडे़-बडे़ दावे किए थे और कहा था कि हिंदी माध्यम के छात्रों की पीड़ा वह समझते हैं। जल्द ही अनुवादित पुस्तकें छात्रों को मिलेंगी, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी हिंदी माध्यम की पुस्तकें नहीं मिली। गत वर्ष एमए इतिहास के एक पेपर आधुनिक और मध्यकालीन इतिहास में 191 में से 121 छात्रों की ईआर (एसेंशियल रिपीट) आई थी। उस समय भी छात्रों का रोष इस बात को लेकर था कि वह हिंदी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं इसलिए न प्राध्यापक उनकी सुनते हैं और न ही हिंदी में उनके लिए पुस्तकें हैं। अब एनएसयूआइ इस संबंध में डीयू प्रशासन को घेरने की तैयारी में हैं। उधर, एबीवीपी के प्रदेश मंत्री रोहित चहल ने कहा है कि शुक्रवार को हिंदी माध्यम के छात्रों की समस्या पर डीयू के अधिकारियों का घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही प्रशासन से मांग की जाएगी कि वह छात्रों को हिंदी में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराए।
 
Source- Jagran
24-8-2012

1 comment:

RAMKUMAR YADAV said...

Hindi ko MATRABHASHA kaha jata hai. lekin ab to Hindi ki bahut jyada durdasha hoti najar aa rahi hai. Koyee person jab tak 2-4 bol english ke nahi bol deta tab tak log usko anpadh hi samjhte hai chahe wo hindi medium se M.A. MSc, PhD, hi kyo na ho. School ki library me hindi medium ki books nahi hai. Govt job me bhi english medium walo ko prathmikta di jati hai. Private job me bhi enlish bolne walo ko hi jyadatar select kiya jata hai.
"Un mahan vyaktiyo ke bare me socho jinhone apne desh Hindustan aur uski jan bhasha hindi ko bachane, aur uski raksha karne usko azad karane ke liye apne pran gawa diye." Kewal Enlish seekhne se hi tarakki nahi ho sakti.

"MERE VICHAR SE CLASS 1 SE HIGHER EDUCATION TAK (HINDI+ENGLISH+SANSKRIT) YE TINO LANGUAGE ANIWARYA HONI CHAHIYE.